गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा गुरु शिष्य विभिन्नताओं से भरे हमारे भारत देश में हर रिश्ते को सम्मान देने और उनकी कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए कोई न कोई त्योहार या फिर कोई न कोई अवसर निहित है। इसी प्रकार गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु के प्रति आदर-सम्मान और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के पर्व के रूप में मनाते हैं। इस बार यह गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई है। भारतीय संस्कृति में गुरु को देवता के तुल्य माना गया है। गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूज्य माना गया है। गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ भावार्थ :- गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है; उन सद्गुरु को प्रणाम शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता ह...